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ऑनलाइन फ्रॉड हो गया? पहले घंटे में ये करें

पैसा कट गया हो या कोई कॉल पर डरा रहा हो: 1930, cybercrime.gov.in, बैंक और चक्षु, किस काम के लिए कौन-सा रास्ता, आसान हिंदी में।

Manuj Kumar Pandey20 Oct 20264 मिनट

पैसा कट गया है तो घबराइए नहीं, जल्दी कीजिए। शिकायत जितनी जल्दी होगी, पैसा रोके जाने की संभावना उतनी ज़्यादा होगी।

पैसा कट गया? पहले घंटे में ये 5 काम

1. 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर तुरंत शिकायत दर्ज करें। जल्दी शिकायत से ही पैसा पाने वाले खातों पर रोक लग पाती है।

2. अपने बैंक को बताएँ बैंक के 24x7 नंबर, ऐप या वेबसाइट के फ्रॉड-रिपोर्टिंग लिंक से। शिकायत नंबर, तारीख़ और समय लिखकर रखें।

3. सबूत संभालकर रखें बैंक का अलर्ट SMS, ट्रांज़ैक्शन का रेफ़रेंस नंबर, और वो मैसेज या कॉल डिटेल जिनसे फ्रॉड हुआ। कुछ भी डिलीट न करें।

4. फोन रीसेट करने से पहले सबूत बचाएँ जिस मैसेज या फ़ाइल से फ्रॉड हुआ, उसका भेजने वाले के नंबर, ग्रुप के नाम और समय के साथ स्क्रीनशॉट लें। फोन रीसेट करने या ऐप हटाने से यही सबूत मिट जाते हैं।

5. नंबर को चक्षु पर रिपोर्ट करें जिस नंबर से कॉल, SMS या WhatsApp आया, उसे संचार साथी पोर्टल के चक्षु पर रिपोर्ट करें, पैसा न भी गया हो तब भी।

शिकायत उस दिन करें जिस दिन फ्रॉड हुआ, उस दिन नहीं जिस दिन आपको पक्का यक़ीन हो।

शिकायत से पहले ये जानकारी तैयार रखें

1930 पर कॉल या cybercrime.gov.in पर शिकायत करते समय ये चीज़ें हाथ में हों तो काम जल्दी होता है:

बैंक का अलर्ट SMS: जिसमें रकम, तारीख़, समय और पैसा पाने वाले की जानकारी होती है।

ट्रांज़ैक्शन रेफ़रेंस: UPI या बैंक ट्रांसफ़र का रेफ़रेंस नंबर।

बातचीत का रिकॉर्ड: वो मैसेज, चैट या कॉल डिटेल जिनसे फ्रॉड शुरू हुआ, भेजने वाले के नंबर और समय के साथ।

बैंक की शिकायत संख्या: तारीख़ और समय के साथ।

"डिजिटल अरेस्ट" वाली कॉल आए तो

भारत में डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज़ नहीं है। अक्टूबर 2024 में गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने साफ़ कहा कि CBI, पुलिस, कस्टम्स, ED और जज किसी को वीडियो कॉल पर गिरफ़्तार नहीं करते।

कॉल काटें। वीडियो पर न रहें, स्क्रीन शेयर न करें, कॉल करने वाले के कहने पर कोई ऐप इंस्टॉल न करें।

ख़ुद जाँचें। एजेंसी का नंबर ख़ुद ढूँढकर कॉल करें, कॉलर का दिया नंबर कभी नहीं।

किसी को बताएँ। परिवार में एक व्यक्ति को पूरी बात बताते ही अक्सर फ्रॉड वहीं ख़त्म हो जाता है।

पैसा कभी न भेजें "वेरिफ़िकेशन" या "नाम साफ़ करने" के लिए। कोई एजेंसी ऐसा नहीं माँगती।

वर्दी सिर्फ़ दिखावा है। असली हमला आपको अकेला करना है।

WhatsApp पर APK फ़ाइल आए तो

शादी का कार्ड, RTO चालान, PM-Kisan किस्त, कूरियर स्लिप या KYC अपडेट के नाम पर .apk फ़ाइल भेजी जाती है, अक्सर किसी जान-पहचान वाले के नंबर से, क्योंकि पिछले शिकार का फोन इसे आगे भेज देता है।

फ़ाइल का नाम देखें: आख़िर में .apk है तो वो कार्ड या दस्तावेज़ नहीं, एक ऐप है। इंस्टॉल न करें।

कोई सरकारी विभाग चालान, सब्सिडी या KYC अपडेट APK फ़ाइल में नहीं भेजता।

इंस्टॉल हो गई हो तो: ऐसे ऐप SMS और नोटिफ़िकेशन पढ़कर आपका OTP आपसे पहले देख लेते हैं। बैंक को तुरंत बताएँ और 1930 पर शिकायत करें।

बैंक OTP भेजता है, आप उसे देख ही नहीं पाते। पूरा हमला यही है।

किसी कंपनी को पैसा भेजने से पहले

नौकरी के लिए डिपॉज़िट, नए सप्लायर को एडवांस, या ईमेल में बदला हुआ बैंक खाता: पैसा भेजने से पहले कंपनी को सरकारी रिकॉर्ड में मुफ़्त जाँच सकते हैं।

MCA: mca.gov.in पर कंपनी का नाम या CIN डालें। स्टेटस Active होना चाहिए और पता इनवॉइस वाले पते से मिलना चाहिए।

GST: gst.gov.in पर Search Taxpayer में GSTIN डालें और नाम, स्टेटस और राज्य देखें।

नाम मिलाएँ: UPI ऐप पैसे भेजने से पहले पाने वाले का रजिस्टर्ड नाम दिखाता है। उसे ध्यान से पढ़ें।

रुक जाएँ अगर कंपनी के पेमेंट के लिए किसी का निजी बैंक खाता दिया जाए, या बैंक डिटेल ईमेल से बदली जाए।

RBI का 5 दिन वाला नियम (1 जनवरी 2027 से)

RBI के 24 जून 2026 के निर्देश 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे, उस तारीख़ या उसके बाद हुए इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग ट्रांज़ैक्शन पर।

तीसरे पक्ष की चूक से फ्रॉड: जैसे पेमेंट ऐप, पेमेंट एग्रीगेटर या टेलीकॉम कंपनी की चूक। ट्रांज़ैक्शन के 5 कैलेंडर दिन के अंदर बैंक को बताया तो ग्राहक की देनदारी शून्य।

बैंक की चूक से फ्रॉड: ग्राहक की देनदारी शून्य, चाहे वो रिपोर्ट करे या न करे।

छोटे फ्रॉड पर एक बार मुआवज़ा: जहाँ नुकसान ग्राहक की अपनी चूक से हुआ हो और कुल नुकसान ₹50,000 तक हो, वहाँ शुद्ध नुकसान का 85% या ₹25,000, जो कम हो, ज़िंदगी में एक बार। शर्त: बैंक और 1930 या cybercrime.gov.in, दोनों पर 5 कैलेंडर दिन के अंदर शिकायत।

मोबाइल नंबर और ईमेल बैंक में अपडेट रखें। बदलने के बाद अपडेट न करना ग्राहक की लापरवाही में गिना गया है।

ये सारांश है, कानूनी सलाह नहीं। RBI के निर्देश ही मान्य हैं।

लोग अक्सर पूछते हैं

ऑनलाइन फ्रॉड की शिकायत कहाँ करें? राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें, और अपने बैंक को तुरंत बताएँ।

क्या डिजिटल अरेस्ट असली होता है? नहीं। I4C ने साफ़ कहा है कि CBI, पुलिस, कस्टम्स, ED और जज वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ़्तार नहीं करते। डिजिटल अरेस्ट एक फ्रॉड है।

चक्षु क्या है? दूरसंचार विभाग के संचार साथी पोर्टल पर एक सुविधा, जहाँ संदिग्ध फ्रॉड कॉल, SMS और WhatsApp मैसेज रिपोर्ट किए जाते हैं। जो फ्रॉड हो चुका है, उसकी शिकायत 1930 या cybercrime.gov.in पर करें।

RBI का 5 दिन वाला नियम क्या है? 1 जनवरी 2027 से, तीसरे पक्ष की चूक से हुए फ्रॉड को 5 कैलेंडर दिन के अंदर बैंक को बताने पर ग्राहक की देनदारी शून्य होगी। छोटे फ्रॉड पर एक बार मुआवज़े के लिए बैंक और 1930 या cybercrime.gov.in, दोनों पर 5 दिन के अंदर शिकायत ज़रूरी है।

अंग्रेज़ी में विस्तार सेडिजिटल अरेस्ट स्कैम कैसे चलता है और उसकी रिपोर्ट कहाँ करें: पूरा लेख (English)।→

विस्तार से (English)

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